सन २०२०-२१ च्या नवीन प्रवेशाची प्रक्रिया सुरू झाली आहे. तरी ब्लाॅगवर दिलेल्या लिंकवर जाऊन आपला नवीन प्रवेश नोंदवा.
Tuesday, June 17, 2014
राष्ट्रीय आर्थिक दृष्ट्या मागासवर्गीय शिष्यवृत्ती परीक्षा 2014 निकाल
शिष्यवृत्ती प्राप्त विद्या
र्थ्यांची यादी
सर्व विद्यार्थ्यांचे हार्दिक अभिनंदन ... !
निवड झाले ल्या विद्यार्थ्यांनी स्टेट बँक ऑफ इंडिया मध्ये खाते उघडून त्याची झेरॉक्स कॉपी तसेच जातीच्या दाखल्याची झेरॉक्स कॉपी शाळेत लवकरात लवकर सादर करावी.
| SEAT.NO. | CANDIDATE NAME | SEX | CATEGORY | GMAT | SAT | TOTAL | RESULT | SELECTION |
| 339141508023 | DESALE TEJ JAGDISH | M | OBC | 55 | 38 | 93 | PASS | OBC - 003 |
| 339141508025 | DEVKAR OMKAR BALASAHEB | M | GEN | 40 | 40 | 80 | PASS | GEN - 290 |
| 339141508027 | DHAVAN MANGESH MACHCHHINDRA | M | NT | 34 | 36 | 70 | PASS | NTDT - 027 |
| 339141508031 | EADKE RASIKA VASANT | F | NT | 42 | 34 | 76 | PASS | NTDT - 015 |
| 339141508035 | GHADIGAONKAR HEMANT SURESH | M | GEN | 40 | 40 | 80 | PASS | GEN - 288 |
| 339141508057 | KAMBLE NIKITA BALNATH | F | SC | 37 | 35 | 72 | PASS | SC - 051 |
| 339141508065 | KINI MEHUL VISHWANATH | M | OBC | 48 | 32 | 80 | PASS | OBC - 061 |
| 339141508069 | KOLEKAR NAMITA HANSARAJ | F | NT | 48 | 46 | 94 | PASS | GEN - 128 |
| 339141508079 | LAGADE KUNAL SHYAM | M | SC | 37 | 35 | 72 | PASS | SC - 050 |
| 339141508089 | MANE MAYUR MAHADEV | F | NT | 54 | 49 | 103 | PASS | GEN - 055 |
| 339141508101 | NARUTE VIDYA SOPAN | F | NT | 37 | 32 | 69 | PASS | NTDT - 030 |
| 339141508119 | PATIL SHUBHAM MADHAV | M | NT | 35 | 46 | 81 | PASS | NTDT - 005 |
| 339141508129 | SARAK KALYANI BAJIRAO | F | NT | 43 | 38 | 81 | PASS | NTDT - 004 |
| 339141508141 | SHELAR SHUBHAM DIPAK | M | GEN | 42 | 59 | 101 | PASS | GEN - 068 |
| 339141508149 | TELI MAYURI SATYAWAN | F | OBC | 35 | 40 | 75 | PASS | OBC - 132 |
| 339141508151 | THOBRE ADITI MOHAN | F | OBC | 36 | 38 | 74 | PASS | OBC - 147 |
निवड झाले ल्या विद्यार्थ्यांनी स्टेट बँक ऑफ इंडिया मध्ये खाते उघडून त्याची झेरॉक्स कॉपी तसेच जातीच्या दाखल्याची झेरॉक्स कॉपी शाळेत लवकरात लवकर सादर करावी.
Saturday, June 14, 2014
महाराष्ट्र प्रज्ञाशोध परीक्षा 2014 निकाल
इयत्ता 10 वी
कुमारी केतकी शैलेंद्र मोडक - राज्यात 27 वी
इयत्ता 9 वी
कुमार सौरभ संजू भोई - जिल्ह्यात 5वा
कुमार कौस्तुभ अरूण राऊत - विशेष पारितोषिक
सर्व यशस्वी विद्यार्थ्यांचे हार्दिक अभिनंदन ..... !!
Standard : X
* NA - Not Applicable, NE - Not Eligible, Ab - Absent
Standard : IX
* NA - Not Applicable, NE - Not Eligible, Ab - Absent
Standard : VIII
* NA - Not Applicable, NE - Not Eligible, Ab - Absent
कुमारी केतकी शैलेंद्र मोडक - राज्यात 27 वी
इयत्ता 9 वी
कुमार सौरभ संजू भोई - जिल्ह्यात 5वा
कुमार कौस्तुभ अरूण राऊत - विशेष पारितोषिक
सर्व यशस्वी विद्यार्थ्यांचे हार्दिक अभिनंदन ..... !!
| Name | Seat No | Marks | **Viva Marks | Total Marks* | Remark | Rank |
| Gurav Rutuja Prakash | VS12 X011 | 0 | NE | 0 | Absent | 0 |
| Modak Ketakee Shailendra | VS12 X030 | 141 | 36 | 177 | State Level Prize | 27 |
| Surve Pooja Ravindra | VS12 X064 | 0 | NE | 0 | Absent | 0 |
| Name | Seat No | Marks | **Viva Marks | Total Marks* | Remark | Rank |
| Bane Prachi Suryakant | VS12 9003 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Bhogadkar Sarvesh Surendra | VS12 9005 | 86 | NA | 86 | Certificate | 0 |
| Bhoi Saurabh Sanju | VS12 9006 | 134 | NA | 134 | District Level Prize | 5 |
| Bhowad Aditya Ashok | VS12 9008 | 99 | NA | 99 | Certificate | 0 |
| Bichkule Akshay Arjun | VS12 9009 | 58 | NA | 58 | 0 | |
| Bobhate Shridhar Suhas | VS12 9011 | 68 | NA | 68 | 0 | |
| Chaudhari Himanshu Ghanshyam | VS12 9014 | 109 | NA | 109 | Certificate | 0 |
| Chavan Suhas Sudhir | VS12 9017 | 57 | NA | 57 | 0 | |
| Govalkar Shrutika Devendra | VS12 9034 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Jadhav Shwetali Balkrushna | VS12 9041 | 70 | NA | 70 | Certificate | 0 |
| Kadam Mayur Subhash | VS12 9048 | 71 | NA | 71 | Certificate | 0 |
| Keni Tejas Ravindra | VS12 9055 | 67 | NA | 67 | 0 | |
| Kumbhar Vivek Hindurao | VS12 9062 | 87 | NA | 87 | Certificate | 0 |
| Mohite Megha Dharmadas | VS12 9074 | 87 | NA | 87 | Certificate | 0 |
| Mohite Mihir Vinay | VS12 9075 | 106 | NA | 106 | Certificate | 0 |
| Mohite Omkar Manoj | VS12 9076 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Mohite Priyanka Hanmant | VS12 9077 | 79 | NA | 79 | Certificate | 0 |
| Padvi Pooja Vijay | VS12 9081 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Patil Dhanshree Shivram | VS12 9086 | 82 | NA | 82 | Certificate | 0 |
| Patil Hemant Ashok | VS12 9088 | 79 | NA | 79 | Certificate | 0 |
| Patil Pankaj Nanabhau | VS12 9090 | 66 | NA | 66 | 0 | |
| Pawar Pritam Krishna | VS12 9100 | 70 | NA | 70 | Certificate | 0 |
| Rathod Dhiraj Rajendra | VS12 9104 | 97 | NA | 97 | Certificate | 0 |
| Raut Kaustubh Arun | VS12 9107 | 126 | NA | 126 | Special Prize | 0 |
| Sable Sanika Pralhad | VS12 9113 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Sakpal Shubham Ramesh | VS12 9114 | 100 | NA | 100 | Certificate | 0 |
| Sarkokte Sanket Keshav | VS12 9117 | 89 | NA | 89 | Certificate | 0 |
| Sawant Ruchiket Anil | VS12 9119 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Tare Ashlesha Kisan | VS12 9126 | 63 | NA | 63 | 0 | |
| Tupsounder Vishal Vishnu | VS12 9132 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Walve Latikesh Manohar | VS12 9138 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Yesaji Mitesh Dattaram | VS12 9139 | 70 | NA | 70 | Certificate | 0 |
| Name | Seat No | Marks | **Viva Marks | Total Marks* | Remark | Rank |
| Chavan Omkar Sandeep | VS11 8018 | 91 | NA | 91 | Certificate | 0 |
| Desle Tej Jagdish | VS11 8024 | 0 | NA | 0 | Absent | 0 |
| Mainkar Harshali Vijay | VS11 8062 | 105 | NA | 105 | Certificate | 0 |
| Pardhi Aishwarya Rajendra | VS11 8088 | 102 | NA | 102 | Certificate | 0 |
| Rane Siddhesh Santosh | VS11 8113 | 91 | NA | 91 | Certificate | 0 |
Thursday, May 15, 2014
11 th online admission 2014
Timetable for 11th online admission will be displayed on Monday 19th May 2014 in school.
Tuesday, April 29, 2014
Thursday, March 13, 2014
अण्णासाहेब वर्तक स्मारक विद्यामंदिर, विरार
ll प्रज्वलितो ज्ञानमयः प्रदीपः ll
आगाशी विरार अर्नाळा शिक्षण
संस्थेचे
अण्णासाहेब वर्तक स्मारक विद्यामंदिर, विरार
तालुका वसई, जिल्हा ठाणे,
महाराष्ट्र
पूर्व पीठिका :
सन 1956 पर्यंत विरार गावात माध्यमिक शिक्षणाची काहीच सोय नव्हती. विद्या
संपादन करू इच्छिणा-या विद्यार्थ्यांना आगाशी, विलेपार्ले, दादर किंवा मुंबईच्या
अन्य भागात जावे लागे किंवा अशा प्रकारची सोय असलेल्या ठिकाणी राहण्याची व्यवस्था
करावी लागे. गरीब व मध्यम वर्गांतून येणा-या विद्यार्थ्यांना हे शक्य नसल्याने
त्यांना माध्यमिक शिक्षणास वंचित व्हावे लागे.
विदृयार्थ्यांची ही गैरसोय दूर व्हावी अशी या भागातील अनेक समाजसेवी व्यक्तींची
तीव्र आकांक्षा जाणून घेऊन आगाशी, विरार, अर्नाळा शिक्षण संस्थेच्या चालकांनी
मा. भाऊसाहेब वर्तक यांच्या प्रेरणेने 1956 साली विरार येथे माध्यमिक शाळा चालू
करण्याचा निर्णय घेतला. या बाबतीत विरार ग्रामपंचायतीचे त्यावेळचे सरपंच श्री.
वामनराव सामंत यांच्या नेतृत्वाखाली पुढाकार घेऊन प्रारंभी इयत्ता आठवीचा वर्ग
सुरू केला. ठाणे जिल्हा स्कूल बोर्डाच्या परवानगीने हा वर्ग प्रथम विरार येथील
हिरा विदृयालयाच्या एका खोलीत भरत असे. शाळेचे नामकरण ''विद्यामंदिर, विरार'' असे
करण्यात आले. आगाशी येथील शाळेतील ज्येष्ठ शिक्षक श्री. प्र. भा. जोशी यांची या
शाळेचे मुख्याध्यापक म्हणून नेमणूक झाली. सुरूवातीस शाळेचे फक्त 36 विद्यार्थी
होते.
अण्णासाहेबांचे चिरंतन स्मारक :
पहिल्या वर्षी इमारतीचा प्रश्न सुटला.
परंतु शाळेच्या विकासाच्या दृष्टीने ठाणे जिल्हा परिषदेच्या इमारतीतून शाळेचे
स्थलांतर संस्थेच्या स्वतःच्या इमारतीत होणे क्रमप्राप्तच होते, सन 1957 मध्ये
संस्थेचे विश्वस्त माननीय भाऊसाहेब वर्तक यांच्या प्रयत्नाने रेल्वेचे
पूर्वेकडील तीन एकर गुरचरण जमीन व ओस पडलेली मिलिटरी बॅरॅक तत्कालीन बांधकाम खात्याचे
मंत्री कै. मालोजीराव नाईक निंबाळकर यांनी संस्थेच्या स्वाधीन केली. या इमारतीत
योग्य ती डागडुजी केल्यानंतर जून 1957 मध्ये शाळेचे स्थलांतर करण्यात आले.
सन 1953 मध्ये शाळेचे महाराष्ट्रातील एक
थोर समाजसेवक मुंबई राज्याचे माजी स्थानिक स्वराज्यमंत्री व विरार गावचे एक
सुपुत्र श्री. अण्णासाहेब वर्तक यांचे निधन झाले. विरार हे कै. अण्णासाहेबांचे
जन्मस्थानच नव्हे तर सार्वजनिक जीवनाचे उगमस्थान असल्याने या गावी त्यांचे
उचित व चिरंतन स्मारक व्हावे म्हणून अण्णासाहेब वर्तक स्मारक निधी समिती स्थापन
करण्यात आली. समितीने सुमारे रु. 25000/- चा निधी गोळा केल्यानंतर तत्कालीन
मुंबई शासनाकडून मिळालेल्या जागेवर शाळेसाठी प्रश्स्त इमारत बांधण्यात यावी व
शाळेला अण्णासाहेब वर्तक स्मारक विद्यामंदिर असे नाव द्यावे असा या समितीने
निर्णय घेतला. कै. अण्णासाहेब वर्तक यांच्यासारख्या थोर शिक्षणप्रेमी
समाजसेवकाचे विद्यामंदिराखेरीज अन्य उचित स्मारक होणे शक्य नाही. कै. अण्णासाहेब
आगाशी- विरार - अर्नाळा शिक्षणसंस्थेचे विश्वस्तही होते. त्यांचे स्मारक
इमारतीचे भूमिपूजन अण्णासाहेबांचे सहकारी व संस्थेचे विश्वस्त कै. प्रभूदास
शहा यांच्या हस्ते 10 मार्च 1958 रोजी करण्यात आले. त्यानंतर विद्यामंदिराच्या
बांधकामास गती मिळाली. बांधकामाचे काम चालू असताना विरार येथील एक नागरिक श्री.
भास्कर हरी चौधरी यांनी संस्थेवरील लोभामुळे दररोज शाळेत उपस्थित राहून
बांधामावर देखरेख केली. तसेच बांधकामासाठी लागणा-या विटा वाहून आणण्याचे काम
शाळेच्या विद्यार्थ्यांनी श्रमदानाने केले. संस्थेचे माजी कार्यवाह श्री. प.
पां. म्हात्रे, अधीक्षक श्री. नी. के. कोटणीस व संस्थेच्या उपाध्यक्षा ताराबाई
वर्तक यांनी या कामासाठी बहुमोल मार्गदर्शन केल्याने इमारतीचे बांधकाम नियोजित
काळात पूर्ण झाले. नवीन इमारतीचा उद्घाटन सोहळा 15 फेब्रुवारी 1959 रोजी त्यावेळेच्या
मुंबई राज्याचे मुख्यमंत्री ना. यशवंतरावजी चव्हाण यांच्या हस्ते होऊन शाळेला
अण्णासाहेब वर्तक स्मारक विद्यामंदिर हे नाव देण्यात आले. या इमारतीसाठी एकूण
रू. 33,462 एवढा खर्च झाला.
शाळेचा प्रगतीपट :
शाळेच्या पहिल्या तीन वर्षांत संपूर्ण
आर्थिक सहाय्य विरार ग्रामपंचायतीने केल्यानंतर सन 1959 पासून
आगाशी-विरार-अर्नाळा शिक्षण संस्थेने शाळेची संपूर्ण जबाबदारी स्विकारली.
विरार येथील आपल्या विद्यामंदिराला अण्णासाहेब
वर्तक स्मारक विद्यामंदिर हे नाव देऊन आगाशी-विरार-अर्नाळा शिक्षणसंस्थेने अण्णासाहेबांनी
शैक्षणिक क्षेत्रात केलेल्या कार्याचा एक प्रकारे गौरवच केला. या गौरवात संस्थेचाही
गौरव झाला आहे असे म्हणणे योग्य ठरेल.
सन 1956 मध्ये प्रारंभी शाळेत विद्यार्थी
संख्या 36 होती. परंतु विद्यार्थी संख्या झपाट्याने वाढत राहिल्याने मिलीटरी
बॅरॅक व नवीन इमारतीतील पाच खोल्या ही जागा शाळेसाठी अपुरी पडू लागली. म्हणून
1960-61 साली सुमारे 32,000/- रुपये खर्च करून मूळ इमारतीवर नवीन मजला बांधून आणखी
पाच खोल्यांची सोय करण्यांत आली. या मजल्यासाठी महाराष्ट्र शासनाकडून शाळेला
रू. 15,000/- चे अनुदान मिळाले. या नवीन बांधकामाचे उद्घाटन पार्ले कॉलेजचे
प्राचार्य चिं. ब. जोशी यांच्या हस्ते 12 फेब्रुवारी 1961 रोजी झाले. वाढत्या
विद्यार्थी संख्येची सोय करण्यासाठी सन 1965 मध्ये सुमारे रू. 16,000/- खर्च
करून संस्थेने आणखी दोन खोल्या बांधल्या. यापैकी एका खोलीसाठी विरार येथील एक
उद्योजक श्री. गोविंद गोपाळराव कामत यांनी आपले बंधू कै. दामोदर गोपाळ कामत यांच्या
स्मृतिप्रीत्यर्थ तीन हजार रुपयांची उदार देणगी देऊन संस्थेला उपकृत केले.
सन 1967 मध्ये आगाशी-विरार-अर्नाळा शिक्षण
संस्थेने ना. भाऊसाहेब वर्तक यांच्या नेतृत्वाखाली साजरा करण्यात आलेल्या
रौपमहोत्सव समारंभ प्रसंगी प्राप्त झालेल्या निधीतून आणि प्रसिध्द उद्योगपती श्री.
शा. म. डहाणूकर यांनी दिलेल्या उदार देणगीतून 1969 मध्ये रूपये 21,000/- खर्च
करून हॉल बांधण्यात आला.
विद्यामंदिर शाळेच्या गरजा तात्पुरत्या
भागल्या तरी विकसनशील शाळेच्या गरजा सतत वाढत असल्याने इमारतीचे प्रश्न
आगाशी-विरार-अर्नाळा शिक्षणसंस्थेला सन 1970 मध्ये हाताळणे भाग पडले. तसेच सन
1957 पासून वापरात असलेल्या मिलिटरी बॅरॅक मध्ये दुरूस्त्या करणे अत्यावश्यक
होते. या सर्व गोष्टींचा विचार करून एक हॉल व चार खोल्यांचे बांधकाम सन 1971 मध्ये
हाती घेण्यात आले. या कामात रू. 85,200 इतका खर्च आला. शाळेच्या सांस्कृतिक
कार्यक्रमासाठी उपयुक्त असा रंगमंच बांधण्याचे कामही सन 1976 मध्ये सुरू करण्यात
आले व सुमारे 25,000 रुपये खर्चून रंगमंच शाळेसाठी उपलब्ध करून देण्यात आला. संस्थेचे
तत्कालीन अध्यक्ष पद्मश्री कै. भाऊसाहेब वर्तक व उपाध्यक्षा व महाराष्ट्र राज्याच्या
राज्यमंत्री कै. ताराबाई (माईसाहेब) वर्तक यांच्या कुशल व प्रभावी व्यक्तीमत्त्वाचा लाभ
संस्थेला झाल्याने अल्प काळात विरार येथील माध्यमिक शाळेचा विकास साधता आला.
संस्थेचे कार्यवाह कै. श्री. हिराजी मुकूंद कवळी व संस्थेचे सहकार्यवाह आणि आपल्या
शाळेचे माजी मुख्याध्यापक कै. श्री. प्र. भा जोशी यांचेही परिश्रम या बाबतीत
विसरता येणार नाहीत. तसेच शाळेच्या स्थापनेपासून एकनिष्ठ व कार्यतत्पर अशा
कार्यकत्यांचा लाभ संस्थेला प्रथम पासूनच झाल्यानेच ही वाटचाल करता आली.
शाळेची आजची प्रगती :
सन 1956 मध्ये शाळेत सुरुवातीस 8वीचा एक वर्ग व 36 विद्यार्थी होते. दरवर्षी विद्यार्थी संख्येत वाढ होत गेली. आज शाळेत इयत्ता पाचवी
ते दहावीच्या एकूण 56 तुकड्या असून सुमारे साडेतीन हजार विद्यार्थी शिक्षण घेत
आहेत. शाळेत जून 1973 पासून प्राथमिक विभागही सुरू करण्यात आला असून त्यात
सुमारे साडे सहाशे विद्यार्थी आहेत. शाळेत 77 शिक्षक, 5 शिक्षकेतर कर्मचारी, 1
ग्रंथपाल, 1 प्रयोग शाळा परिचर, 8 चतुर्थश्रेणी कर्मचारी सेवेत आहेत. शाळेत एकूण
30 वपर्गखोल्या आहेत. अद्ययावत विज्ञान प्रयोगशाळा, संगणक कक्ष तसेच सुसज्ज असे
ग्रंथालय आहे.
शालेय परीक्षांखेरीज शाळेचे विद्यार्थी
गणित, हिंदी, विज्ञान, चित्रकला व टिळक विद्यापीठाच्या गणित व इंग्लिश विषयाच्या
परीक्षांना बसतात व उज्ज्वल यश संपादन करतात. तसेच महाराष्ट्र राज्य शिक्षण
परिषद पुणे तर्फे घेण्यात येणा-या एनएनएमएस आणि एनटीएस, विज्ञान अध्यापक
मंडळातर्फे आयोजित होमी भाभा बालवैज्ञानिक परीक्षा, सी. व्ही. रामन विज्ञान
परीक्षा, वसई विरार महानगर पालिका आयोजित वसई कला क्रीडा अंतर्गत होणा-या विविध स्पर्धा,
तालुक्यातील विविध शाळांच्या स्पर्धा यांमध्ये शाळेचे विद्यार्थी हिरीरीने भाग
घेतात. शाळा दृक श्राव्य साधनांनी सुसज्ज् आहे. टेलिव्हिजन, सीडी प्लेअर, अॅम्प्लिफायर,
एल. सी. डी. प्रोजेक्टर, नकाशे, शैक्षणिक तक्ते, इत्यादि साधनांही शाळा सुसज्ज्
आहे.
शाळेचे ग्रंथालय विविध साहित्याने परिपूर्ण
असून मराठी, हिन्दी, इंग्रजी भाषेतील श्रेष्ठ साहित्य व कलाकृतीने विभूषित झाले
आहे. कथा, कादंबरी, विनोदी साहित्य, निबंध, नाट्य, चरित्र, काव्य, इतिहास,
कलाविज्ञान व तत्त्वज्ञान इत्यादि विषयांवरील शिक्षकांसाठी सुमारे साडे सात
हजार पुस्तके आहेत. विद्यार्थ्यांसाठी खेळ, संस्कार, गोष्टी, सामान्य ज्ञान
यांवर आधारित सुमारे साडे आठ हजार पुस्तके आहेत. ग्रंथालयात मराठी, इंग्रजी
भाषेतील विविध विश्वकोष उपलब्ध आहेत. लोकसत्ता, सकाळ, महाराष्ट्र टाईम्स,
नवाकाळ, लोकमत यांसारखी प्रमुख दैनिके तसेच विविध नियतकालिके नियमित येतात.
दरवर्षी प्रकाशित होणारे विविध विषयांचे दिवाळी अंक विकत घेतले जातात.
गरीब, गरजू विद्यार्थ्यांना गणवेष, पुस्तके,
वह्या इत्यादी आवश्यक शैक्षणिक साहित्य अध्यक्षीय निधीतून देऊन त्यांच्या विद्यार्जनाच्या
मार्गातील अडथळे दूर करण्यात येतात.
शाळेच्या यशाचे शिल्पकार :
ही शाळा स्थापन
करण्यात व तिचा विकास करण्यासाठी अनेकांचे साहाय्य कारणीभूत झालेले आहे. आगाशी
विरार अर्नाळा शिक्षणसंस्थेचे प्रथम अध्यक्ष माननीय पद्मश्री कै. भाऊसाहेब वर्तक
यांनी शाळेच्या स्थापनेपासूनच तिच्या विकासकार्यातील मोठा भार उचलला व त्यामुळेच
अवघ्या काही वर्षांत शाळेची प्रगती होऊ शकली. आदरणीय भाऊसाहेब यांच्याच
मार्गदर्शनाखाली शाळेची रूपरेषा आखण्यात आली व शाळा नावारूपाला आली. संस्थ्येच्या
माजी अध्यक्षा व महाराष्ट्र राज्याच्या माजी राज्यमंत्री श्रीमती ताराबाई (माईसाहेब) वर्तक तसेच माईसाहेबांचे
चिरंजीव श्री. विकासबंधू वर्तक यांचाही शाळेच्या संवर्धनात व विकासात मोठा हिस्सा
आहे. आपल्या राजकीय व सामाजिक क्षेत्राचा प्रचंड पसारा सांभाळून शाळेच्या विकास
कार्यात ज्या तत्परतेने व आत्मीयतेने माननीय भाऊसाहेब व ताराबाई वर्तक यांनी
लक्ष घातले त्यामुळेच शाळेची प्रगती वेगाने होऊ शकली.
संस्थेचे कार्यवाह श्री. हिराजी मुकूंद (नानासाहेब) कवळी तसेच संस्थेच्या
शालेय समितीचे अध्यक्ष श्री. परशुराम पांडुरंग (नानासाहेब) म्हात्रे, विरार ग्रामपंचायतीचे तत्कालीन
सरपंच श्री. वामनराव सामंत, संस्थेचे सहकार्यवाह व शाळेचे माजी मुख्याध्यापक
श्री. प्र. भा. जोशी यांनाही शाळेच्या भरघोस प्रगतीचे श्रेय आहे. शाळेच्या विकास
कार्यात के. जी. हायस्कूलचे माजी मुख्याध्यापक व संस्थेच्या शाळांचे अधिक्षक
श्री. नी. के. कोटणीस यांनीही सतत मार्गदर्शन आपला वाटा उचलला.
शाळेच्या स्थापनेपासून विरार ग्रामपंचायत
व आताची वसई विरार महानगरपालिका वेळोवेळी सहाय्य करीत असते. विरार मधील अनेक
सुविद्य नागरिकांचे तसेच माजी विद्यार्थ्यांचेही सहकार्य शाळेला मिळत असते.
शाळेच्या प्रगतीमध्ये शाळेचे शिक्षक
व शिक्षकेतर सेवकांच्या निरलस व सेवाभावी
वृत्त्तीचाही मोठा भाग असतो. शाळेच्या उत्कर्षात सौ. शशिकला मोगरे, श्री. नंदन
पाटील, श्री. अनंत हरि पाटील, यांचाही मोठा वाटा आहे.
शाळेच्या आत्तापर्यंतच्या वाटचालीत विरार
परिसरातील अनेक ज्ञात, अज्ञात व्यक्तींचे सहकार्य मिळाले आहे. आगाशी विरार अर्नाळा शिक्षण संस्थेचे
पदाधिकारी, सभासद, हितचिंतक, नागरिक, शाळेचे सर्व शिक्षक व शिक्षकेतर सेवक या
सर्वांच्या सहकार्याचा वरदहस्त आतापर्यंत जसा लाभला तसा तो भावी काळातही लाभेल व
त्यामुळे संस्थेला नवीन बळ प्राप्त होत राहील अशी आशा वाटते.
संदर्भ - सुवर्ण महोत्सव सन 2005-06 विशेषांक
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अण्णासाहेब वर्तक स्मारक विद्यामंदिर,विरार.येथे आगाशी विरार अर्नाळा शिक्षण संस्थेचे अध्यक्ष माननीय श्री.विकास नरसिंह वर्तक यांच्या मार्गदर्शन...










